September 12, 2026

यूआईआईडीबी को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर प्रमुख सचिव एवं यूआईआईडीबी एमडी श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम की मीडिया से बातचीत

यूआईआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि आवंटित किए जाने की बात तथ्यात्मक रूप से गलत, अब तक मात्र 45 एकड़ भूमि ही बोर्ड को उपलब्ध

राज्य में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, रोजगार के नए अवसर सृजित करने तथा उपलब्ध सरकारी भूमि एवं संसाधनों के सुनियोजित एवं आर्थिक उपयोग के उद्देश्य से गठित उत्तराखंड इन्फ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड (यूआईआईडीबी) की कार्यप्रणाली को लेकर हाल के दिनों में विभिन्न माध्यमों से सामने आई सूचनाओं के संबंध में राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। सरकार की ओर से कहा गया है कि यूआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि उपलब्ध कराए जाने संबंधी जानकारी तथ्यात्मक नहीं है। वर्तमान में यूआईआईडीबी को चिन्हित भूमि में से मात्र 45 एकड़ भूमि ही उपलब्ध हो पाई है। न तो 7,000 बीघा भूमि यूआईआईडीबी को दी गई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने की कोई प्रक्रिया संचालित है।

प्रमुख सचिव नियोजन एवं प्रबंध निदेशक यूआईआईडीबी श्री आर. मीनाक्षी सुंदरम ने कहा कि हाल ही में कुछ स्वतंत्र मीडिया संस्थानों तथा विभिन्न सार्वजनिक मंचों पर यूआईआईडीबी की परियोजनाओं एवं कार्यक्रमों को लेकर प्रश्न उठाए गए हैं। ऐसे में आवश्यक है कि इससे संबंधित सही और तथ्यात्मक जानकारी जनता के समक्ष रखी जाए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति अथवा भ्रम की स्थिति उत्पन्न न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी को 7,000 बीघा भूमि मिलने की बात सही नहीं है। यूआईआईडीबी को इतनी भूमि न तो प्राप्त हुई है और न ही इतनी भूमि प्राप्त करने का कोई प्रयास गया है। उन्होंने कहा कि अब तक चिन्हित भूमि में से केवल 45 एकड़ भूमि ही यूआईडीबी को उपलब्ध हुई है।

यूआईआईडीबी के गठन का उद्देश्य सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना

श्री सुंदरम ने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन के पीछे राज्य के दीर्घकालिक आर्थिक विकास से जुड़े स्पष्ट उद्देश्य हैं। राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी पांच वर्षों में प्रदेश के सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) को दोगुना करना है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए राज्य में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना, रोजगार के अवसर सृजित करना तथा निवेश परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक आधारभूत संसाधन उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि राज्य में आयोजित इन्वेस्टर समिट के दौरान बड़ी संख्या में निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। इन निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए निवेशकों को आवश्यक सुविधाओं के साथ उपयुक्त भूमि एवं अन्य आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना आवश्यक है। यूआईआईडीबी का गठन इसी व्यापक उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि विशेष रूप से सेवा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए एक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था उपलब्ध हो सके।

उन्होंने कहा कि औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था पहले से कार्य कर रही है। इसी प्रकार यूआईडीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण एवं बड़े स्तर के पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने का प्रयास किया जा रहा है। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि की आवश्यकता होती है। ऐसे में यूआईडीबी का उद्देश्य निवेशकों के लिए उपलब्ध संसाधनों को व्यवस्थित रूप से चिन्हित करना और नियमानुसार उपलब्ध कराते हुए निवेश की प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

श्री सुंदरम ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के साथ विकसित उत्तराखंड के निर्माण का लक्ष्य भी राज्य की विकास नीति का महत्वपूर्ण आधार है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए पूंजी निवेश, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार आवश्यक है। उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है और पर्यटन राज्य होने के कारण पर्यटन, आतिथ्य, वेलनेस, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण निवेश को बढ़ावा देना आवश्यक है।

पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी एवं वेलनेस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने का प्रयास

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड को एक प्रमुख पर्यटन एवं वेलनेस डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इसके लिए उच्च गुणवत्ता वाले होटल, रिसॉर्ट, वेलनेस सेंटर तथा अन्य पर्यटन सुविधाओं में पूंजी निवेश आवश्यक है। यूआईडीबी का उद्देश्य ऐसे निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए आवश्यक भूमि एवं आधारभूत संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाना है, ताकि राज्य में पर्यटन आधारित आर्थिक गतिविधियों का विस्तार हो सके और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर सृजित हों।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को एक प्रमुख वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की भी व्यापक संभावनाएं हैं। देश में जयपुर और उदयपुर जैसे शहर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं और इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी व्यापक लाभ मिला है। इसी प्रकार उत्तराखंड में भी उच्च गुणवत्ता वाले होटल एवं आतिथ्य सुविधाओं के विकास के लिए पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाना आवश्यक है। यूआईआईडीबी इसी प्रकार के सेवा क्षेत्र के निवेश के लिए आवश्यक भूमि एवं संसाधनों की उपलब्धता को आसान बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप उत्तराखंड को देश के प्रमुख पर्यटन एवं वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके लिए राज्य में आवश्यक बुनियादी एवं आतिथ्य सुविधाओं के विकास में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। इससे पर्यटन के साथ-साथ स्थानीय व्यवसाय, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद और अन्य संबद्ध सेवा क्षेत्रों को भी लाभ मिलेगा।

शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश के लिए भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर*

श्री सुंदरम ने कहा कि उत्तराखंड देश के महत्वपूर्ण शिक्षा केंद्रों में से एक है। प्रदेश में अनेक प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान कार्यरत हैं, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा के क्षेत्र में विस्तार की पर्याप्त संभावनाएं हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि शिक्षा के क्षेत्र में बड़े एवं गुणवत्तापूर्ण पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किया जाए, ताकि उच्च शिक्षा एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों का विस्तार राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में हो सके।

उन्होंने कहा कि यूआईआईडीबी के गठन का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ऐसे सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करना भी है, जिनसे राज्य की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक लाभ मिल सकता है। शिक्षा के क्षेत्र में बड़े निवेश के लिए उपयुक्त भूमि एवं आधारभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है। यूआईआईडीबी ऐसी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए निवेश के लिए उपलब्ध सरकारी संसाधनों को नियमानुसार चिन्हित एवं व्यवस्थित करने की दिशा में कार्य कर रहा है, ताकि निवेशकों के लिए प्रक्रिया सुगम हो और राज्य में गुणवत्तापूर्ण संस्थानों का विस्तार हो सके।

उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड के युवाओं को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, बेंगलुरु और देश के अन्य बड़े शहरों की ओर जाने के बजाय राज्य में ही बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। शिक्षा के क्षेत्र में निवेश से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। इसी प्रकार स्वास्थ्य, वेलनेस, पर्यटन और आतिथ्य जैसे सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित करने से राज्य के आर्थिक विकास को नई गति दी जा सकती है।

सेवा क्षेत्र में निवेश के लिए व्यवस्थित लैंड बैंक की आवश्यकता

प्रमुख सचिव नियोजन ने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में निवेश के लिए उपयुक्त भूमि उपलब्ध कराना अपने आप में एक महत्वपूर्ण चुनौती है। राज्य में निजी स्तर पर भूमि खरीद की प्रक्रिया विभिन्न कारणों से जटिल है। ऐसे में सेवा क्षेत्र की निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक भूमि उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सरकारी भूमि का एक व्यवस्थित लैंड बैंक तैयार करना आवश्यक है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका उद्देश्य सरकारी भूमि का अनियोजित हस्तांतरण अथवा विक्रय नहीं है, बल्कि ऐसी भूमि का चिन्हीकरण एवं नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना है, जो वर्तमान में अनुपयोगी या आर्थिक गतिविधियों के लिए उपयोग में नहीं आ रही है। यूआईडीबी के माध्यम से ऐसी भूमि को नियमानुसार उपयोग में लाकर पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश को प्रोत्साहित किया जा सकेगा।

उन्होंने कहा कि उपलब्ध सरकारी भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों, प्रचलित कानूनों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप ही किया जाएगा। इसका उद्देश्य निवेशकों के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाना है, ताकि राज्य में निवेश की प्रक्रिया अधिक प्रभावी और व्यवस्थित हो सके।

यूआईआईडीबी की भूमिका सर्विस सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करना

श्री सुंदरम ने कहा कि औद्योगिक एवं विनिर्माण क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य में सिडकुल जैसी संस्थागत व्यवस्था कार्य कर रही है। इसी प्रकार सेवा क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उत्तराखंड में बड़े और गुणवत्तापूर्ण निवेश को आकर्षित करने के उद्देश्य से यूआईआईडीबी का गठन किया गया है।

उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका है। पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य, आईटी तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में निवेश की व्यापक संभावनाएं हैं। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए भूमि एवं अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है। यूआईडीबी का उद्देश्य इन्हीं आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उपलब्ध सरकारी संसाधनों का व्यवस्थित चिन्हीकरण, नियोजन और नियमानुसार उपयोग सुनिश्चित करना तथा निवेशकों के लिए निवेश प्रक्रिया को सुगम बनाना है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड से पहले पंजाब और गुजरात जैसे राज्यों में भी इसी प्रकार की संस्थागत व्यवस्था विकसित की जा चुकी है। उत्तराखंड देश का ऐसा तीसरा राज्य है, जहां सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने तथा उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग के उद्देश्य से इस प्रकार के बोर्ड का गठन किया गया है।

ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी और यूआईआईडीबी अलग-अलग व्यवस्थाएं

प्रमुख सचिव नियोजन ने यह भी स्पष्ट किया कि यूआईआईडीबी को ऑप्टिमल लैंड एक्विजिशन कमेटी के साथ जोड़कर देखा जाना उचित नहीं है। उन्होंने बताया कि ऑप्टिमल लैंड यूटिलाइजेशन कमेटी का गठन यूआईआईडीबी से पहले वर्ष 2022 में किया गया था। इसका उद्देश्य मुख्य रूप से विभिन्न विभागों के बीच भूमि हस्तांतरण से जुड़ी प्रक्रियागत कठिनाइयों को दूर करना था, क्योंकि एक विभाग से दूसरे विभाग को सरकारी भूमि हस्तांतरित करने में कई बार व्यावहारिक एवं प्रशासनिक समस्याएं सामने आती थीं।

उन्होंने कहा कि दोनों व्यवस्थाओं की भूमिका एवं उद्देश्य अलग-अलग हैं और इन्हें एक ही व्यवस्था के रूप में देखना तथ्यात्मक रूप से उचित नहीं होगा।

सरकारी भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यूआईआईडीबी के माध्यम से निवेश को प्रोत्साहित करने का अर्थ सरकारी भूमि का विक्रय नहीं है। भूमि का स्वामित्व राज्य सरकार के पास ही रहेगा। निवेश परियोजनाओं के लिए भूमि का उपयोग निर्धारित नियमों एवं शर्तों के तहत लीज मॉडल के माध्यम से किया जाएगा। संबंधित परियोजनाओं में लागू पर्यावरणीय एवं अन्य वैधानिक मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।

सरकार का उद्देश्य अनुपयोगी सरकारी भूमि को किसी व्यक्ति अथवा निजी संस्था के पक्ष में स्थायी रूप से हस्तांतरित करना नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का नियोजित तरीके से उपयोग करते हुए राज्य में आर्थिक गतिविधियों और सेवा क्षेत्र के निवेश को बढ़ावा देना है। कुछ लोगों द्वारा यह भ्रांति फैलाई जा रही है की भूमि लीज पर 90 वर्ष के लिए दी जा रही है जबकि लीज की अवधि अवधि 60 वर्ष है |

स्थानीय रोजगार एवं अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

यूआईआई डीबी के माध्यम से पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी, वेलनेस, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा अन्य सेवा क्षेत्रों में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित किए जाने से राज्य में रोजगार एवं स्वरोजगार के नए अवसर सृजित होने की संभावना है। निवेश से स्थानीय स्तर पर परिवहन, होटल, होम स्टे, खान-पान, हस्तशिल्प, स्थानीय उत्पाद तथा अन्य संबद्ध गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा।

राज्य सरकार का मानना है कि उत्तराखंड की प्राकृतिक एवं मानवीय संसाधन क्षमता का बेहतर उपयोग करते हुए नियोजित एवं पर्यावरणीय रूप से संतुलित आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने से राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के व्यापक अवसर उपलब्ध कराए जा सकते हैं।

सरकार ने कहा कि यूआईआईडीबी से संबंधित सभी प्रक्रियाएं निर्धारित नियमों, पारदर्शिता और नियोजित विकास की अवधारणा के अनुरूप संचालित की जा रही हैं। 7,000 बीघा भूमि यूआईडीबी को उपलब्ध कराए जाने संबंधी तथ्य सही नहीं हैं। वर्तमान में बोर्ड को मात्र 45 एकड़ भूमि उपलब्ध हुई है। इसलिए इस संबंध में किसी भी प्रकार की भ्रांति से बचने के लिए आधिकारिक एवं तथ्यात्मक जानकारी को ही आधार बनाया जाना आवश्यक है।

राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को निवेश, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य, वेलनेस एवं अन्य सेवा क्षेत्रों का प्रमुख केंद्र बनाते हुए स्थानीय स्तर पर रोजगार और आर्थिक गतिविधियों का विस्तार करना है। यूआईआईडीबी इसी उद्देश्य से सेवा क्षेत्र में पूंजी निवेश को प्रोत्साहित करने, निवेश परियोजनाओं के लिए आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता को सुगम बनाने तथा सरकारी संसाधनों के नियमानुसार एवं सुनियोजित उपयोग की दिशा में कार्य कर रहा है।

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